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यादगार 26 जनवरी: रोहन की अनोखी देशभक्ति | Republic Day Story

पढ़ें 'यादगार 26 जनवरी' की प्रेरक कहानी। जानें कैसे एक छोटी सी कोशिश ने रोहन के गणतंत्र दिवस को खास बना दिया। बच्चों के लिए Republic Day Special Story।

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छुट्टी का उत्साह और रोहन की योजना

प्यारे बच्चों! 26 जनवरी (Republic Day) का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में क्या आता है? स्कूल की परेड, लड्डू और... छुट्टी! है न? हम सभी को इस राष्ट्रीय त्योहार का इंतज़ार रहता है। लेकिन क्या यह दिन सिर्फ छुट्टी मनाने के लिए है? आज लॉटपॉट.कॉम (Lotpot.com) पर हम आपके लिए एक ऐसी कहानी लेकर आए हैं, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।

यह कहानी है 10 साल के रोहन की। रोहन एक बहुत ही शरारती लेकिन होशियार बच्चा था। हर साल की तरह इस साल भी 25 जनवरी की शाम को वह बहुत खुश था।

"हुर्रे! कल स्कूल नहीं जाना पड़ेगा! कल तो मैं दिन भर वीडियो गेम खेलूँगा और देर तक सोऊँगा," रोहन ने अपने दोस्तों से कहा।

उसके दादाजी, जो एक रिटायर फौजी थे, पास ही बैठे अखबार पढ़ रहे थे। उन्होंने चश्मा नीचे खिसकाते हुए पूछा, "रोहन बेटा, कल 26 जनवरी है, हमारे देश का गणतंत्र दिवस। क्या तुम ध्वजारोहण (Flag Hoisting) के लिए नहीं चलोगे?"

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रोहन ने लापरवाही से कहा, "अरे दादाजी, वो तो टीवी पर भी देख सकते हैं। सुबह-सुबह ठंड में पार्क कौन जाएगा?"

दादाजी की शर्त और सुबह का नज़ारा

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दादाजी मुस्कुराए और बोले, "ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है। अगर तुम कल मेरे साथ सुबह पार्क चलोगे, तो मैं तुम्हें वह नया रिमोट कंट्रोल हेलीकॉप्टर दिलाऊँगा जो तुम्हें चाहिए था।"

हेलीकॉप्टर का नाम सुनते ही रोहन की नींद उड़ गई। उसने तुरंत हाँ कर दी। "ठीक है दादाजी! मैं चलूँगा।"

अगली सुबह, यानी यादगार 26 जनवरी की सुबह, कड़ाके की ठंड थी। रोहन जैकेट और मफलर पहनकर दादाजी के साथ सोसायटी के पार्क की ओर चल पड़ा। लेकिन वहाँ पहुँचकर उसने जो देखा, उससे उसका उत्साह ठंडा पड़ गया।

पार्क में सन्नाटा था। पिछली रात बहुत तेज़ आँधी और बारिश आई थी। जिस जगह झंडा फहराया जाना था, वहाँ कीचड़ जमा था। सजावट के लिए लगाए गए कागज के झंडे गिरे हुए थे और कुर्सियां इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं।

सोसायटी के सेक्रेटरी और कुछ बड़े लोग वहाँ खड़े होकर बहस कर रहे थे। "सफाई कर्मचारी तो आज छुट्टी पर हैं, अब यह कीचड़ कौन साफ करेगा?" एक अंकल बोले। "इतनी गंदगी में झंडा कैसे फहराएंगे? इस बार प्रोग्राम कैंसिल कर देते हैं," दूसरे ने सुझाव दिया।

गणतंत्र का मतलब: शिकायत नहीं, समाधान

रोहन यह सब सुन रहा था। उसे लगा कि अब ध्वजारोहण नहीं होगा और शायद उसे हेलीकॉप्टर भी नहीं मिलेगा। उसने दादाजी की ओर देखा।

दादाजी ने एक गहरी सांस ली और रोहन के कंधे पर हाथ रखकर कहा, "बेटा, आज हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं क्योंकि आज के दिन हमारे देश का संविधान (Constitution) लागू हुआ था। संविधान हमें सिर्फ अधिकार नहीं देता, कर्तव्य (Duties) भी सिखाता है। हम सरकार या दूसरों को दोष देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते।"

रोहन ने पूछा, "तो हम क्या करें दादाजी?"

दादाजी ने पास पड़ी एक झाड़ू उठाई और बोले, "गणतंत्र का मतलब है—गण (लोग) का तंत्र (सिस्टम)। यानी हम ही देश हैं। अगर जगह गंदी है, तो हम ही इसे साफ करेंगे।"

एक 70 साल के बुजुर्ग को झाड़ू लगाते देख रोहन को बहुत शर्म आई। उसे याद आया कि स्कूल में टीचर ने बताया था कि देश को साफ रखना भी देशभक्ति है।

रोहन की पहल: एक यादगार 26 जनवरी की शुरुआत

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रोहन ने अपनी जैकेट के बटन कसे और दौड़कर एक वाइपर ले आया। उसने चिल्लाकर कहा, "दादाजी, आप रुकिए! यह काम हम बच्चे करेंगे।"

रोहन ने अपने दोस्तों—आर्यन, रिया और कबीर—को फोन किया जो अभी सो रहे थे। "जल्दी पार्क आ जाओ! आज हमें एक मिशन पूरा करना है!" रोहन ने जोश में कहा।

देखते ही देखते, 10-15 बच्चे पार्क में जमा हो गए। किसी ने कुर्सियां सीधी कीं, किसी ने गिरे हुए कागज उठाए, और किसी ने कीचड़ साफ किया। बच्चों को काम करता देख, बहस करने वाले बड़े लोग भी चुप हो गए। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। वे भी मदद के लिए आगे आए।

जो पार्क 15 मिनट पहले वीरान और गंदा दिख रहा था, अब वह साफ-सुथरा और सजा हुआ लग रहा था। बच्चों ने गीले फर्श पर रंगोली तो नहीं बनाई, लेकिन फूलों की पंखुड़ियों से 'जय हिंद' लिख दिया।

तिरंगा लहराया और गर्व से सीना चौड़ा हुआ

सूरज निकल आया था। अब माहौल पूरी तरह बदल चुका था। सोसायटी के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति होने के नाते, दादाजी को झंडा फहराने के लिए बुलाया गया।

जैसे ही दादाजी ने डोरी खींची और तिरंगा (Tricolor) हवा में लहराया, उस पर से गुलाब की पंखुड़ियां बच्चों के ऊपर गिरीं।

"जन-गण-मन अधिनायक जय हे..."

राष्ट्रगान गाते समय रोहन का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। आज उसे वह खुशी मिल रही थी जो वीडियो गेम खेलकर कभी नहीं मिलती। उसने महसूस किया कि उसने सिर्फ सफाई नहीं की, बल्कि देश के सम्मान को बचाया है।

समारोह के बाद, दादाजी ने सबके सामने रोहन और उसके दोस्तों को मंच पर बुलाया। दादाजी ने माइक पर कहा, "आज इन बच्चों ने हमें सिखाया कि असली यादगार 26 जनवरी कैसे मनाई जाती है। देशभक्ति सिर्फ स्टेटस लगाने या नारे लगाने में नहीं है, बल्कि अपने देश को बेहतर बनाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने में है।"

निष्कर्ष: रोहन की सीख

घर लौटते समय रोहन के हाथ में लड्डू का डिब्बा था। दादाजी ने पूछा, "तो रोहन, अब चलें हेलीकॉप्टर खरीदने?"

रोहन मुस्कुराया और बोला, "दादाजी, हेलीकॉप्टर तो चाहिए, लेकिन आज मुझे उससे भी बड़ा इनाम मिल गया।" "वो क्या?" दादाजी ने पूछा। "आज मुझे लगा कि मैं भी भारत का एक सिपाही हूँ," रोहन ने गर्व से कहा।

बच्चों, रोहन की यह यादगार 26 जनवरी हमें यह सिखाती है कि हम चाहे छोटे हों या बड़े, देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अपने आस-पास सफाई रखना, पानी बचाना, बिजली बचाना और नियमों का पालन करना—यही सच्ची देशभक्ति है।

इस कहानी से हमने क्या सीखा?

  1. कर्तव्य पालन (Duty): अधिकारों के साथ-साथ हमें अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए।

  2. पहल करना (Initiative): दूसरों का इंतज़ार करने के बजाय, अच्छे काम की शुरुआत खुद करनी चाहिए।

  3. सामूहिकता (Unity): जब हम मिलजुल कर काम करते हैं, तो बड़ी से बड़ी समस्या भी हल हो जाती है।

तो इस बार, आप अपनी 26 जनवरी को यादगार कैसे बनाएंगे? हमें कमेंट में जरूर बताएं!

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लेखक: लॉटपॉट.कॉम संपादकीय टीम

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